बिहार बनेगा मोबाइल निर्माण का नया हब: राहुल गांधी का बड़ा वादा
भारतीय राजनीति में एक नया नारा गूंज रहा है – “अब मेड इन चाइना नहीं, मेड इन बिहार होगा मोबाइल।” नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह घोषणा करके एक नई बहस छेड़ दी है। जगरन जैसे प्रमुख मीडिया आउटलेट्स ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाया है। यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि बिहार के आर्थिक भविष्य का एक संभावित ब्लूप्रिंट है। क्या वाकई बिहार, जो पलायन और बेरोजगारी की मार झेल रहा है, भारत की मोबाइल निर्माण राजधानी बन सकता है? इस लेख में हम इसी सपने की वास्तविकता, चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
बयान का मूल सार और राजनीतिक संदर्भ
राहुल गांधी का यह बयान बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आया। उन्होंने केंद्र सरकार पर चीन पर निर्भरता बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार बनने पर बिहार को मोबाइल निर्माण का केंद्र बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य स्पष्ट है: बिहार के युवाओं को रोजगार के स्थानीय अवसर देना और देश में चीन पर निर्भरता घटाना। यह बयान केवल एक आर्थिक वादा नहीं, बल्कि बिहार के मतदाताओं को एक स्पष्ट रोडमैप दिखाने की एक राजनीतिक रणनीति भी है।
बिहार में मोबाइल निर्माण की संभावनाएं कितनी वास्तविक हैं?
सैद्धांतिक रूप से, बिहार में मोबाइल निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण है सस्ता और विपुल श्रम बल। बिहार से हर साल हजारों युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। अगर राज्य में ही उद्योग लगें, तो यही श्रमबल सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। दूसरा, बिहार की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक है। यह पूर्वी और उत्तरी भारत के बीच एक पुल की तरह है, जो लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए फायदेमंद हो सकता है। तीसरा, सरकार अगर इच्छाशक्ति दिखाए, तो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और उद्योग-अनुकूल नीतियों के जरिए निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है।
किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?
हालांकि संभावनाएं बड़ी हैं, लेकिन राह आसान नहीं है। बिहार को इस राह में कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा:
- बुनियादी ढांचे की कमी: दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु और कर्नाटक के मुकाबले बिहार में औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर अभी काफी कमजोर है। बिजली, सड़क और परिवहन के सुचारू साधनों की आवश्यकता होगी।
- कुशल श्रमिकों की कमी: मोबाइल निर्माण के लिए केवल सस्ता श्रम ही काफी नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित और कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने होंगे।
- निवेश का माहौल: निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए एक स्थिर और अनुकूल औद्योगिक नीति का होना जरूरी है।
PLI योजना और बिहार का क्या होगा रोल?
केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने भारत में मोबाइल निर्माण को बड़ा बढ़ावा दिया है। अभी इसका फायदा ज्यादातर दक्षिणी राज्यों को मिल रहा है। राहुल गांधी के वादे का तात्पर्य है कि ऐसी योजनाओं का लाभ बिहार जैसे राज्यों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। अगर बिहार को PLI योजना के दायरे में विशेष रूप से शामिल किया जाता है, तो बड़ी मोबाइल कंपनियों के लिए वहां फैक्ट्री लगाना आकर्षक हो सकता है। इससे पूरे क्षेत्र में एक सप्लाई
