मोबाइल नहीं रखते हैं अजीत डोभाल, NSA ने खुद बता दी वजह; जानें कंप्यूटर का ऐसे करते हैं इस्तेमाल
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल देश की सुरक्षा के सबसे संवेदनशील रहस्यों के रखवाले हैं। उनकी दिनचर्या और कार्यशैली पर अक्सर चर्चा होती है, लेकिन एक बात जो सबको हैरान करती है, वह है उनकी डिजिटल आदत। हैरानी की बात यह है कि देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी के पास एक निजी मोबाइल फोन नहीं है। यह जानकारी खुद NSA अजीत डोभाल ने एक कार्यक्रम में छात्रों के सामने साझा की। यह सुनने में अटपटा लग सकता है, लेकिन साइबर सुरक्षा के इस दौर में, यह एक सोची-समझी और बेहद महत्वपूर्ण रणनीति है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्यों अजीत डोभाल मोबाइल फोन से दूरी बनाए हुए हैं और सूचना तकनीक का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
मोबाइल फोन है सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा: अजीत डोभाल
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एक छात्र के सवाल पर NSA अजीत डोभाल ने स्पष्ट किया कि वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने कहा, “मैं मोबाइल फोन नहीं रखता… मुझे लगता है कि यह एक बुरी आदत है।” यह कोई साधारण पसंद नहीं, बल्कि गहरी सुरक्षा समझदारी का नतीजा है। उन्होंने आगे समझाया कि मोबाइल फोन एक “ट्रोजन हॉर्स” की तरह है जो आपकी हर गतिविधि पर नजर रख सकता है। ट्रोजन हॉर्स प्राचीन यूनान की एक रणनीति थी, जिसमें दुश्मन एक बड़े लकड़ी के घोड़े के अंदर छिपकर शहर के अंदर घुस गया था। ठीक उसी तरह, एक मोबाइल फोन भी एक सुविधाजनक उपकरण के रूप में आपके जीवन में शामिल होता है, लेकिन यह आपकी निजी बातचीत, लोकेशन, और संवेदनशील डेटा को चुराने का एक जरिया बन सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय: डोभाल की सोच है सटीक
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डोभाल के इस नजरिए की पुष्टि करते हैं। डॉ. अभिजीत हल्देर, एक साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञ, बताते हैं, “एक स्मार्टफोन माइक्रोफोन, कैमरा, जीपीएस, और कई सेंसर से लैस एक छोटा कंप्यूटर है। हैकर्स के लिए इसे रिमोटली एक्टिवेट करके आपके कमरे की बातचीत तक रिकॉर्ड करना कोई मुश्किल काम नहीं है। अजीत डोभाल जैसे व्यक्ति, जिनके पास राष्ट्रीय महत्व की जानकारियां हैं, के लिए मोबाइल फोन वाकई में एक बड़ा सुरक्षा जोखिम है। उनकी यह सावधानी उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
यह जोखिम कोरी कल्पना नहीं है। हमें पेगासस स्पाइवेयर जैसे मामले याद हैं, जहां सरकारों के लिए बने स्पाइवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन हैक करने के लिए किया गया था। अगर आम लोगों के फोन इस तरह के सोफिस्टिकेटेड अटैक का शिकार हो सकते हैं, तो देश के NSA का फोन तो सबसे बड़ा टारगेट होगा।
तो फिर कैसे करते हैं काम? कंप्यूटर और सिक्योर्ड सिस्टम पर निर्भरता
सवाल उठता है कि अगर मोबाइल फोन नहीं, तो वह संचार और सूचना के लिए किस पर निर्भर हैं? अजीत डोभाल ने बताया कि वह कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उसका तरीका भी बेहद खास है।
- सिक्योर्ड और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन: वह सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। ये सिस्टम आम ईमेल या मैसेजिंग ऐप्स की तरह नहीं होते। इनमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होता है, जिसे तोड़ना लगभग नामुमकिन होता है।
- ऑफलाइन या एयर-गैप्ड नेटवर्क: बेहद संवेदनशील जानकारियों वाले कंप्यूटरों को अक्सर इंटरनेट से अलग-थलग (एयर-गैप्ड) रखा जाता है। इससे बाहरी दुनिया से हैक होने का कोई खतरा नहीं रहता।
- काम के लिए सीमित इस्तेमाल: डोभाल ने स्पष्ट किया कि वह कंप्यूटर का इस्तेमाल सिर्फ काम के लिए करते हैं, न कि मनोरंजन या सोशल मीडिया के लिए। यह आदत उनके डिवाइस को अनावश्यक सॉफ्टवेयर और मालवेयर के खतरे से बचाती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि वह दुनिया से कटे हुए हैं। उनके कार्यालय में एक टीम होती है जो जरूरी संचार संभालती है। जरूरी फोन कॉल और संदेश उन तक सुरक्षित चैनलों के माध्यम से पहुंचाए जाते हैं।
आम जनता के लिए सीख: डिजिटल सुरक्षा के मायने
अजीत डोभाल की यह आदत सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हम सभी के लिए एक सबक है। हमारे पास राष्ट्रीय रहस्य तो नहीं, लेकिन हमारे पास बैंक डिटेल्स, पर्सनल फोटो, प्राइवेट चैट्स जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां जरूर हैं। हम डोभाल जैसी सख्त सुरक्षा तो नहीं अपना सकते, लेकिन कुछ बुनियादी कदम उठाकर अपनी सुरक्षा बढ़ा सकते हैं:
- ऐप परमिशन पर नजर रखें: किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन (जैसे माइक, कैमरा, लोकेशन) न दें।
- स्ट्रॉन्ग पासवर्ड और 2FA: मजबूत, यूनिक पासवर्ड का इस्तेमाल करें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को जरूर चालू करें।
- सॉफ्टवेयर अपडेट: अपने फोन और ऐप्स को हमेशा अप टू डेट रखें। यह अपडेट सुरक्षा के छेदों को ठीक करते हैं।
- पब्लिक वाई-फाई से सावधानी: पब्लिक वाई-फाई पर बैंकिंग या महत्वपूर्ण काम न करें।
- डिजिटल डिटॉक्स: कभी-कभार फोन से दूरी बनाना भी मानसिक और डिजिटल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
निष्कर्ष: सुरक्षा की कीमत है सतर्कता
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का मोबाइल फोन न रखने का फैसला एक संदेश है कि सच्ची सुरक्षा की कीमत सतर्कता और कुछ सुविधाओं का त्याग है। यह केवल एक व्यक्ति की आदत नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में लिया गया एक जिम्मेदारी भरा कदम है। एक ऐसे युग में जहां डेटा नया तेल है और साइबर युद्ध एक वास्तविकता है, डोभाल का यह रवैया देश की सुरक्षा प्रणाली की मजबूती और समर्पण को दर्शाता है। आम नागरिकों के लिए, यह हमें अपनी डिजिटल आदतों पर पुनर्विचार करने और व्यक्तिगत सुरक्षा को गंभीरता से लेने की प्रेरणा देता है। अंत में, यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि कभी-कभी, सबसे उन्नत तकनीक का सबसे सुरक्षित इस्तेमाल यही है कि आप उसका इस्तेमाल ही न करें।
